झाँसी, उत्तर प्रदेश, सुल्तान आब्दी: झाँसी में एक सरकारी वकील (विशेष लोक अभियोजक) पर अपने पद का दुरुपयोग कर अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) अधिनियम से संबंधित एक मामले में अभियुक्तों की पैरवी करने का गंभीर आरोप लगा है। संतोष कुमार दोहरे एडवोकेट, जो कि जिला एवं सत्र न्यायालय झाँसी में प्रैक्टिस करते हैं, ने इस मुद्दे को उठाते हुए दावा किया है कि सरकारी वकील अभियोजन और पीड़ित के बजाय अभियुक्तों का पक्ष ले रहे हैं।
सरकारी वकील पर कदाचार का आरोप
एडवोकेट संतोष कुमार दोहरे के अनुसार, उन्होंने संबंधित विशेष लोक अभियोजक से यह स्पष्ट कहा कि अभियुक्तों की पैरवी करके वे अधिवक्ता अधिनियम के तहत कदाचार कर रहे हैं। दोहरे ने उन्हें आगाह किया कि ऐसा करने से उनका बार काउंसिल लाइसेंस रद्द हो सकता है और राज्य सरकार उन्हें पद से हटा सकती है, क्योंकि सरकारी वकील का कार्य अभियुक्त की पैरवी करना नहीं होता।
संतोष दोहरे ने बताया कि इसके बावजूद सरकारी वकील नहीं माने और तीन बार यह दावा किया, “मैं कर सकता हूं, मैं कर सकता हूं, मैं कर सकता हूं।” जब एडवोकेट दोहरे ने उनसे कहा कि यदि उन्होंने अभियुक्तों की पैरवी की, तो वे उनकी शिकायत करेंगे, तो सरकारी वकील ने “डंके की चोट पर” चुनौती दी कि वे शिकायत कर सकते हैं।
अदालत ने रोका, आदेश जल्द होगा सार्वजनिक
इस पर एडवोकेट संतोष कुमार दोहरे ने न्यायालय में एक प्रार्थना पत्र दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि विशेष लोक अभियोजक पीड़ित की पैरवी न कर अभियुक्तों की पैरवी कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘प्रोफेशनल मिसकंडक्ट’ और राज्य सरकार के साथ धोखा बताते हुए विशेष लोक अभियोजक को अभियुक्तों की पैरवी करने से रोकने का अनुरोध किया।
अदालत ने एडवोकेट दोहरे की बात को स्वीकार किया और माननीय न्यायालय ने विशेष लोक अभियोजक को अभियुक्तों की पैरवी करने से मना कर दिया।
दलित समाज को न्याय पर उठे सवाल
एडवोकेट संतोष कुमार दोहरे ने इस घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया है कि, “जब सरकारी वकील ही मुलजिमों का साथ देगा और वह भी SC/ST न्यायालय में, तो क्या दलित समाज को न्याय मिल सकेगा, जब सरकारी वकील ही मुलजिम का पक्ष ले रहा हो, और वह भी डंके की चोट पर यहाँ तक की अदालत को आदेश करके उसे रोकना पड़े।” उन्होंने कहा कि शीघ्र ही माननीय न्यायालय का उपरोक्त आदेश सार्वजनिक किया जाएगा, जिसे पढ़कर लोग इस स्थिति पर विचार कर सकते हैं।
बार काउंसिल और मुख्यमंत्री को शिकायत
संतोष कुमार दोहरे ने बताया कि इस मामले में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश, माननीय मुख्यमंत्री एवं प्रमुख सचिव न्याय को उचित कार्यवाही के लिए शिकायत भेजी जाएगी। उनका उद्देश्य है कि इस तरह की प्रथा पर रोक लग सके, जहाँ अनुसूचित जाति/जनजाति के पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए नियुक्त सरकारी वकील ही उन्हीं के विरोध में पैरवी कर रहे हैं। यह कदम न्याय प्रणाली में विश्वास बनाए रखने और पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित कराने की दिशा में उठाया गया है।
