अग्र भारत संवाददाता
आगरा। ताजगंज क्षेत्र स्थित होटल हावर्ड प्लाजा में आईपीएल सट्टेबाजी के मामले में की गई पुलिस कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। इस प्रकरण में संगठित अपराध की धाराओं में शामिल किए गए ताज प्रेस क्लब के सचिव ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर साजिशन फंसाने का आरोप लगाया है। वहीं सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
जमानत पर रिहा होने के बाद ताज प्रेस क्लब के सचिव पीयूष शर्मा ने आरोप लगाया कि उन्हें होटल से गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि पुलिस द्वारा उनके घर से पूछताछ के नाम पर उठाकर ले जाया गया। बाद में उन्हें संगठित अपराध की धाराओं में आरोपी बनाकर प्रकरण में शामिल दिखा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि इस घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद हैं, जो उनके दावे की पुष्टि कर सकते हैं।
पीयूष शर्मा ने यह भी सवाल उठाया कि जब मामला जुआ अधिनियम के तहत बनता है तो उन पर संगठित अपराध की गंभीर धाराएं क्यों लगाई गईं। इस पूरे घटनाक्रम के बाद ताजगंज पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं और मामला सोशल मीडिया से लेकर पुलिस महकमे तक चर्चा का विषय बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने होटल में छापेमारी कर पांच लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि कथित बड़े सटोरिये अनी पंडित, राधेश्याम मल्होत्रा और उनके कुछ सहयोगी अब भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। इससे कार्रवाई की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
वायरल तस्वीर से बढ़ा विवाद

सोशल मीडिया पर वायरल एक तस्वीर ने मामले को और तूल दे दिया है। तस्वीर में एसीपी मयंक तिवारी के साथ दिख रहे व्यक्ति को मनोज उपाध्याय उर्फ छोटू उपाध्याय बताया जा रहा है, जिस पर पूर्व में गंभीर आपराधिक आरोप लग चुके हैं। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
