सिकंदरा पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, बिना सत्यापन सूचना प्रपत्रों पर लगने के आरोप
अग्र भारत संवाददाता ,पीतम sharma,आगरा। आगरा पुलिस कमिश्नरेट में भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी और पुलिसकर्मियों की शिकायतों के लिए हेल्पलाइन संचालित है। शिकायतों की जांच के बाद पुलिस कमिश्नर द्वारा दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन से लेकर मुकदमा दर्ज कराने तक की कार्रवाई की जाती रही है। इसके बावजूद कुछ मामलों में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

मंगलवार को सिकंदरा क्षेत्र में कथित फाइनेंस एजेंटों द्वारा एक वाहन को जबरन कब्जे में लेने का मामला सामने आया। पीड़ित का आरोप है कि वाहन को बंद पड़े पेट्रोल पंप के अंदर ले जाकर दबाव बनाया गया, वीडियो रिकॉर्ड कराया गया तथा विरोध करने पर महिलाओं और परिजनों के साथ अभद्रता की गई। शिकायत के बाद भी थाना स्तर पर तत्काल कार्रवाई नहीं होने से पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।टूंडला, फिरोजाबाद निवासी सुमित कुमार पुत्र उदयपाल सिंह ने बताया कि वह मंगलवार दोपहर अपनी पत्नी और बच्चों के साथ आगरा-मथुरा रोड से रुनकता की ओर से आगरा आ रहे थे। आरोप है कि रास्ते में स्विफ्ट और स्विफ्ट डिजायर कार में सवार सात से आठ लोगों ने उनका पीछा किया। महिंद्रा शोरूम के पास एक वाहन आगे और दूसरा बगल में लगाकर उनकी गाड़ी रुकवा ली गई।सुमित के अनुसार, उन्हें और उनके परिवार को वाहन से नीचे उतार दिया गया। मोबाइल से किसी को सूचना देने का प्रयास किया तो फोन छीनने की कोशिश की गई। इसके बाद वाहन को एक बंद पड़े पेट्रोल पंप के अंदर ले जाया गया। पीड़ित का आरोप है कि जब उन्होंने कथित फाइनेंस कर्मियों से परिचय पत्र दिखाने को कहा तो उनके साथ अभद्रता और मारपीट की गई। वहीं उनका वीडियो भी रिकॉर्ड किया गया और कथित रूप से दबाव बनाकर मनमाफिक बयान दिलाने का प्रयास किया गया।”सुमित ने बताया कि उनकी गाड़ी महिंद्रा फाइनेंस से ऋण पर खरीदी गई थी। कुल 48 किस्त थी , जिनमें से 45 किस जमा हो चुकी हैं ,बीते माह 21 मई को उन्होंने अंतिम भुगतान किया था, जबकि इससे पहले की दो किस्तें बकाया थीं। उनका कहना है कि उन्हें फाइनेंस कंपनी की ओर से कोई नोटिस प्राप्त नहीं हुआ था। इसके बावजूद कथित रूप से दबंगई के बल पर वाहन कब्जे में लिया गया।जबकि आगरा की जिलाधिकारी मनीष बंसल ने इन मामलों में बताया कि बिना नोटिस गाड़ी खींचना अवैध है , जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी फाइनेंस कंपनी की होगी,कार्यवाही भी की जियेगी, पीड़ित का आरोप है कि जब वह शिकायत लेकर थाना सिकंदरा पहुंचे तो उन्हें केवल प्रार्थना पत्र देकर जाने की बात कही गई। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि हाईवे पर इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।यह सब पुलिस की मिली भगत से संचालित हो रहा है।
बिना जांच के लग रही मुहरें?,स्थानीय लोगों ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर बताया कि वाहन कब्जे में लेने के बाद संबंधित लोग कई बार थानों अथवा चौकियों से सूचना प्रपत्रों पर मुहर लगवा लेते हैं। उनका आरोप है कि कई मामलों में वाहन स्वामी और फाइनेंस कंपनी के अधिकृत प्रतिनिधि की उपस्थिति सुनिश्चित किए बिना ही दस्तावेजों पर मुहर लगा दी जाती है। लोगों का कहना है कि यदि थानों और चौकियों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
जनप्रतिनिधि ने अधिकारियों से की शिकायत,क्षेत्र के एक जनप्रतिनिधि ने सहायक पुलिस आयुक्त अमीषा सिंह से मुलाकात कर कथित अवैध रिकवरी एजेंटों की गतिविधियों और क्षेत्रीय पुलिस की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।जनप्रतिनिधि का कहना है कि वह इस मामले को पुलिस आयुक्त के समक्ष भी उठाएंगे तथा गोपनीय जांच कराकर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों और संलिप्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।अब देखना यह होगा कि हाईवे पर कथित रिकवरी एजेंटों की गतिविधियों और उन पर लग रहे संरक्षण के आरोपों की जांच में पुलिस प्रशासन क्या कदम उठाता है।
