उत्तर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमडी-एमएस की 5,766 सीटें बढ़ाने को NMC ने मंजूरी दी है। सरकारी कॉलेजों को 3,054 और निजी संस्थानों को 2,712 सीटें मिलीं।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों को मिलीं 3,054 और निजी संस्थानों को 2,712 नई पीजी सीटें; KGMU में करीब 300 और लोहिया संस्थान में 160 सीटों का इजाफा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में स्नातकोत्तर यानी एमडी-एमएस पाठ्यक्रमों की 5,766 सीटें बढ़ाने को मंजूरी मिली है। राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने इन बढ़ी हुई सीटों का कॉलेजवार विवरण जारी कर दिया है। इसमें सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों के साथ स्वशासी, डीम्ड और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के संस्थान भी शामिल हैं।
जारी विवरण के अनुसार, प्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को एमडी-एमएस की 3,054 अतिरिक्त सीटें मिली हैं, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में 2,712 सीटें बढ़ाई गई हैं। इस फैसले से प्रदेश में मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में अवसर बढ़ेंगे। साथ ही भविष्य में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है।
KGMU और लोहिया संस्थान में भी बढ़ीं पीजी सीटें
सीटों में हुई इस बढ़ोतरी का लाभ प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों को भी मिला है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में करीब 300 पीजी सीटें बढ़ाई गई हैं। वहीं, डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में लगभग 160 अतिरिक्त सीटों का इजाफा हुआ है।
इसके अलावा प्रदेश के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में भी बड़ी संख्या में पीजी सीटें बढ़ाई गई हैं। एनएमसी की ओर से जारी कॉलेजवार सूची में विभिन्न संस्थानों को मिली सीटों का विवरण शामिल है। इससे मेडिकल की पढ़ाई के लिए बेहतर अवसर तलाश रहे अभ्यर्थियों को राहत मिलने की संभावना है।
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सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को मिला लाभ
उत्तर प्रदेश में पहले सरकारी क्षेत्र में एमडी-एमएस की करीब 2,200 सीटें थीं, जबकि निजी मेडिकल कॉलेजों में इनकी संख्या 2,100 से अधिक थी। प्रदेश सरकार की ओर से लंबे समय से मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे थे।
एनएमसी की नई मंजूरी के बाद सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा का दायरा बढ़ेगा। इससे मेडिकल कॉलेजों में विशेषज्ञता आधारित पाठ्यक्रमों में प्रवेश के अधिक अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने में मिलेगी मदद
एमडी-एमएस की सीटें बढ़ने से प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टर तैयार करने की क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। चिकित्सा क्षेत्र में विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ने से आने वाले वर्षों में सरकारी और निजी अस्पतालों को भी लाभ मिल सकता है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। खासकर उन क्षेत्रों में इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है, जहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी महसूस की जाती है। हालांकि, इन सीटों पर प्रवेश और शैक्षणिक सत्र से जुड़ी जानकारी संबंधित संस्थानों और आधिकारिक काउंसलिंग कार्यक्रम के अनुसार स्पष्ट होगी।
