पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात की। 18 अक्टूबर को सपा में शामिल होने की चर्चा, बेटी कीर्ति कश्यप की दावेदारी पर भी अटकलें।
Dharmendra Kashyap News: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों में नेताओं के पाला बदलने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच बरेली की आंवला लोकसभा सीट से भाजपा के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने रविवार को लखनऊ में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद उनके सपा में शामिल होने की अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि धर्मेंद्र कश्यप 18 अक्टूबर को समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर सकते हैं। हालांकि, उनके सपा में शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
अखिलेश यादव और धर्मेंद्र कश्यप की मुलाकात के दौरान उनकी बेटी कीर्ति कश्यप के अलावा बरेली के कई सपा नेता भी मौजूद रहे। इस मुलाकात को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। आंवला, बिथरी चैनपुर और बदायूं की दातागंज विधानसभा सीटों को लेकर भी संभावित राजनीतिक समीकरणों की चर्चा सामने आई है।
अखिलेश यादव से कहां हुई धर्मेंद्र कश्यप की मुलाकात?
पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने रविवार को लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट भवन में अखिलेश यादव से मुलाकात की। इस दौरान उनकी बेटी कीर्ति कश्यप, सपा के बरेली जिलाध्यक्ष शुभलेश यादव और वरिष्ठ नेता वीरपाल सिंह यादव भी मौजूद थे।
मुलाकात की तस्वीरें सामने आने के बाद धर्मेंद्र कश्यप के समाजवादी पार्टी में शामिल होने की अटकलें तेज हो गईं। राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, 18 अक्टूबर को उनकी सपा में एंट्री हो सकती है। हालांकि, पार्टी की ओर से इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
इस मुलाकात के बाद आंवला और आसपास की विधानसभा सीटों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। चर्चा है कि आंवला सीट से वीरपाल सिंह यादव और बिथरी चैनपुर से धर्मेंद्र कश्यप की बेटी कीर्ति कश्यप की दावेदारी पर विचार हो सकता है। बदायूं की दातागंज सीट को लेकर भी बातचीत होने की चर्चा है। फिलहाल इन संभावित दावेदारियों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
धर्मेंद्र कश्यप ने क्यों छोड़ी भाजपा?
धर्मेंद्र कश्यप ने हाल ही में भाजपा की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा दिया था। वह वर्ष 2014 और 2019 में भाजपा के टिकट पर आंवला लोकसभा सीट से सांसद चुने गए थे। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
अपनी चुनावी हार के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने पार्टी के कुछ नेताओं पर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि जिन लोगों ने उन्हें चुनाव हराने में भूमिका निभाई, उन्हें पार्टी में सम्मान दिया जा रहा है। इन्हीं नाराजगियों के बीच उन्होंने भाजपा छोड़ने का फैसला किया।
अब अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात के बाद उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
क्षेत्र पंचायत सदस्य से सांसद तक का सफर
धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी राजनीतिक यात्रा वर्ष 1995 में क्षेत्र पंचायत सदस्य के रूप में शुरू की थी। इसके बाद उन्होंने विधानसभा और लोकसभा की राजनीति में अपनी जगह बनाई।
2002 में बसपा के टिकट पर बने विधायक
धर्मेंद्र कश्यप को वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने सन्हा क्षेत्र, जिसे बिथरी चैनपुर क्षेत्र से भी जोड़ा जाता है, से टिकट दिया था। उन्होंने चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा में प्रवेश किया।
बाद में बसपा के कई विधायकों के पार्टी छोड़ने और राजनीतिक समीकरण बदलने के बीच धर्मेंद्र कश्यप भी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए।
2007 में सपा के टिकट पर दर्ज की जीत
समाजवादी पार्टी में शामिल होने के बाद धर्मेंद्र कश्यप ने अपनी राजनीतिक गतिविधियां जारी रखीं। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में सपा ने उन्हें टिकट दिया और उन्होंने जीत हासिल की। तत्कालीन सरकार में उन्हें राज्य मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली।
इसके बाद उन्होंने 2009 का लोकसभा चुनाव और 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ा, लेकिन दोनों चुनावों में उन्हें सफलता नहीं मिली।
2014 में भाजपा में शामिल होकर बने सांसद
वर्ष 2014 में धर्मेंद्र कश्यप भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा के टिकट पर उन्होंने आंवला लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत दर्ज की और दूसरी बार सांसद बने।
हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार मिली। इसके बाद पार्टी के कुछ नेताओं के साथ मतभेद और नाराजगी सामने आई। अंततः उन्होंने भाजपा की सदस्यता छोड़ दी।
2027 चुनाव से पहले यूपी की राजनीति में बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले धर्मेंद्र कश्यप की अखिलेश यादव से मुलाकात को राजनीतिक घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है। उनकी संभावित सपा एंट्री के साथ बरेली और बदायूं क्षेत्र की कुछ विधानसभा सीटों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
हालांकि, धर्मेंद्र कश्यप की सपा सदस्यता, 18 अक्टूबर की संभावित तारीख और उनकी बेटी कीर्ति कश्यप की चुनावी दावेदारी को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी की ओर से कोई घोषणा होती है तो इन चर्चाओं की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
