आगरा नगर निगम के 17वें अधिवेशन में भाजपा और बसपा पार्षदों के बीच जमकर हंगामा हुआ। यशपाल सिंह ने माइक तोड़ा, सुनील शर्मा काली पट्टी बांधकर धरने पर बैठे। भाजपा ने माइक की अर्थी निकाली, महापौर हेमलता दिवाकर को छोड़ना पड़ा सदन। 17वें अधिवेशन में भाजपा और बसपा पार्षदों के बीच जमकर हंगामा, सपा पार्षदों ने भी बसपा का दिया साथ; आंखों पर काली पट्टी बांधकर धरने पर बैठे सुनील शर्मा, महापौर हेमलता दिवाकर ने यशपाल सिंह को किया निलंबित
- पहले बोलने की अनुमति को लेकर शुरू हुआ विवाद
- आंखों पर काली पट्टी बांधकर वेल में धरने पर बैठे सुनील शर्मा
- भाजपा पार्षदों ने टूटे माइक की निकाली प्रतीकात्मक अर्थी
- महापौर ने बुलाई पुलिस, यशपाल सिंह को किया निलंबित
- बसपा पार्षदों ने मांगा खेद, महापौर ने किया माफ
- शहर की समस्याएं पीछे, राजनीतिक टकराव बना चर्चा का विषय
आगरा। शहर की समस्याओं, विकास कार्यों और नागरिक सुविधाओं पर चर्चा के लिए बुलाया गया नगर निगम का 17वां अधिवेशन शुक्रवार को राजनीतिक टकराव का अखाड़ा बन गया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा और बसपा पार्षदों के बीच विवाद इतना बढ़ गया कि देखते ही देखते हंगामा, नारेबाजी और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। पहले बोलने की अनुमति नहीं मिलने से नाराज बसपा पार्षदों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान बसपा पार्षद यशपाल सिंह ने सदन का माइक उखाड़कर जमीन पर फेंक दिया। वहीं, बसपा पार्षद दल के नेता सुनील शर्मा आंखों पर काली पट्टी बांधकर सदन के वेल में धरने पर बैठ गए।
बसपा पार्षदों के समर्थन में समाजवादी पार्टी के पार्षद भी उतर आए। दूसरी ओर भाजपा पार्षदों ने टूटे हुए माइक की प्रतीकात्मक अर्थी निकालकर अनोखे अंदाज में विरोध जताया। भाजपा पार्षद राकेश कनौजिया ने माइक की अर्थी पर माला चढ़ाई और छाती पीटकर शोक जताने का प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच स्थिति इतनी बिगड़ गई कि महापौर हेमलता दिवाकर और नगर आयुक्त को सदन छोड़कर जाना पड़ा। काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद बसपा पार्षदों ने महापौर से बातचीत कर उन्हें वापस सदन में आने के लिए मनाया। इसके बाद महापौर दोबारा सदन में पहुंचीं और कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।

पहले बोलने की अनुमति को लेकर शुरू हुआ विवाद
नगर निगम के 17वें अधिवेशन में कार्यवाही शुरू होते ही बसपा पार्षद दल के नेता सुनील शर्मा ने महापौर हेमलता दिवाकर से सबसे पहले अपनी बात रखने की अनुमति मांगी। इस पर महापौर ने सदन की निर्धारित प्रक्रिया का हवाला देते हुए पहले कार्यवाही शुरू होने देने और उसके बाद उन्हें अपनी बात रखने का अवसर देने की बात कही।
महापौर की ओर से तत्काल बोलने की अनुमति नहीं मिलने पर सुनील शर्मा नाराज हो गए। वह अपनी मांग पर अड़े रहे और विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह विवाद भाजपा और बसपा पार्षदों के बीच राजनीतिक टकराव में बदल गया। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होने लगी और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई।
इसी दौरान बसपा पार्षद यशपाल सिंह ने सदन में लगा माइक उखाड़कर जमीन पर फेंक दिया। माइक टूटने के बाद भाजपा पार्षदों का गुस्सा भी भड़क गया। भाजपा पार्षदों ने सदन में गुंडागर्दी नहीं चलेगी के नारे लगाने शुरू कर दिए।
आंखों पर काली पट्टी बांधकर वेल में धरने पर बैठे सुनील शर्मा
विवाद बढ़ने के बाद बसपा पार्षद दल के नेता सुनील शर्मा ने आंखों पर काली पट्टी बांध ली और सदन के वेल में जाकर जमीन पर बैठ गए। उनके समर्थन में अन्य बसपा पार्षद भी धरने पर बैठ गए। बसपा पार्षदों का आरोप था कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है।
इस दौरान समाजवादी पार्टी के पार्षद भी बसपा पार्षदों के समर्थन में खड़े दिखाई दिए। इससे सदन में राजनीतिक खींचतान और तेज हो गई। भाजपा और विपक्षी पार्षदों के बीच लगातार बहस और नारेबाजी होती रही। हंगामे के दौरान महिला पार्षदों के बीच भी धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। कुछ समय के लिए सदन का माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया और सामान्य कार्यवाही बाधित रही।
भाजपा पार्षदों ने टूटे माइक की निकाली प्रतीकात्मक अर्थी
बसपा पार्षद द्वारा माइक तोड़े जाने के विरोध में भाजपा पार्षदों ने अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने टूटे हुए माइक की प्रतीकात्मक अर्थी तैयार की और सदन के भीतर ही प्रदर्शन शुरू कर दिया।
भाजपा पार्षद राकेश कनौजिया ने माइक की अर्थी पर माला चढ़ाई। इसके बाद भाजपा पार्षद छाती पीट-पीटकर रोने का नाटक करते हुए विरोध जताने लगे। इस तरह सदन में एक तरफ बसपा पार्षद आंखों पर काली पट्टी बांधकर धरने पर बैठे थे तो दूसरी तरफ भाजपा पार्षद टूटे माइक की अर्थी निकालकर प्रदर्शन कर रहे थे।
नगर निगम के सदन में हुए इस अनोखे घटनाक्रम को देखकर कुछ देर के लिए बैठक का मूल उद्देश्य ही पीछे छूट गया। शहर की समस्याओं पर चर्चा के बजाय पार्षदों के बीच राजनीतिक प्रदर्शन और आरोप-प्रत्यारोप हावी रहे।
महापौर ने बुलाई पुलिस, यशपाल सिंह को किया निलंबित
लगातार बढ़ते हंगामे के बीच महापौर हेमलता दिवाकर ने कई बार पार्षदों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने सदन की गरिमा बनाए रखने और कार्यवाही चलने देने की अपील की, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव कम नहीं हुआ।
स्थिति बिगड़ती देखकर महापौर ने पुलिस बुला ली। पुलिस के पहुंचने के बाद सदन में स्थिति संभालने का प्रयास किया गया। इसी बीच माइक तोड़ने की घटना को गंभीरता से लेते हुए महापौर ने बसपा पार्षद यशपाल सिंह को सदन से निलंबित कर दिया।
लगातार नारेबाजी और हंगामे से नाराज महापौर हेमलता दिवाकर आखिरकार सदन से उठकर चली गईं। उनके साथ नगर आयुक्त के भी बाहर जाने से बैठक की कार्यवाही कुछ समय के लिए प्रभावित हो गई।
बसपा पार्षदों ने मांगा खेद, महापौर ने किया माफ
काफी देर तक चले हंगामे के बाद बसपा पार्षदों ने मामले को शांत कराने की पहल की। बसपा पार्षद महापौर हेमलता दिवाकर के पास पहुंचे और उनसे बातचीत की। इसके बाद उन्हें दोबारा सदन में लौटने के लिए मनाया गया।
इस दौरान बसपा पार्षद यशपाल सिंह और सुनील शर्मा ने कहा कि सदन में जो कुछ हुआ, वह नहीं होना चाहिए था। यदि उनके किसी व्यवहार या बात से किसी को ठेस पहुंची है तो उन्हें इसका खेद है।
महापौर हेमलता दिवाकर ने सदन में लौटने के बाद कहा कि सदन में हुई घटना निंदनीय है और इस तरह के व्यवहार को उचित नहीं ठहराया जा सकता। हालांकि, दोनों पार्षद सदन के सदस्य हैं, इसलिए उन्हें माफ किया जाता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि माइक तोड़े जाने का मामला जांच का विषय है। जांच पूरी होने के बाद ही इस संबंध में आगे का निर्णय लिया जाएगा।
शहर की समस्याएं पीछे, राजनीतिक टकराव बना चर्चा का विषय
नगर निगम का अधिवेशन शहर की सफाई व्यवस्था, सड़क निर्माण, जलभराव, पेयजल और अन्य नागरिक समस्याओं पर चर्चा करने के लिए आयोजित किया गया था। लेकिन बैठक की शुरुआत में ही राजनीतिक विवाद इतना बढ़ गया कि जनहित के मुद्दे पीछे छूट गए।
सदन में पहले बोलने की अनुमति को लेकर शुरू हुआ विवाद माइक तोड़ने, काली पट्टी बांधकर धरना देने, प्रतीकात्मक अर्थी निकालने और महापौर के सदन छोड़ने तक पहुंच गया।
इस घटनाक्रम ने नगर निगम सदन की गरिमा और जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब माइक तोड़ने की घटना की जांच और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि शहर की बुनियादी समस्याओं पर चर्चा के लिए आयोजित सदन की बैठकें आखिर कब राजनीतिक टकराव से बाहर निकलकर विकास के मुद्दों पर केंद्रित होंगी।
