लखनऊ। योगी आदित्यनाथ सरकार की भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस नीति अब सख्ती के नये दौर में प्रवेश कर गई है। सरकारी अधिकारी – कर्मचारियों के साथ-साथ उनके निजी फिक्सर, ड्राइवर, मुंशी और रिश्तेदारों पर भी एंटी करप्शन का चाबुक बेरहमी से चलना शुरू हो गया है। शासन के सख्त निर्देशों के बाद अब निजी लोगों को हथियार बनाकर रिश्वत वसूलने वाले भी नहीं बच पा रहे हैं।
पुलिस, राजस्व और अन्य विभागों में अधिकारी – कर्मचारी सीधे रिश्वत लेने से बचने के लिए अपने निजी लोगों को आगे कर वसूली का खेल खेल रहे थे। योगी सरकार ने इस सिस्टम को तोड़ने का फैसला कर लिया है। अब न सिर्फ भ्रष्ट सरकारी अधिकारी-कर्मचारी और उनके प्राइवेट सहयोगी भी रंगेहाथ पकड़े जा रहे हैं, अपितु उनके खिलाफ मुकदमे भी दर्ज हो रहे हैं।
मेरठ में एंटी करप्शन टीम ने एक बड़ा सफल अभियान चलाया। पुलिस दरोगा वैभव कुमार के पुलिस फिक्सर गौरव गर्ग को 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया । इस मामले में दरोगा वैभव कुमार, गौरव गर्ग और उनके साथी सौरभ के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया ।
इसी जिले में जूनियर इंजीनियर योगेंद्र कुमार के निजी ड्राइवर नीरज को एक लाख रुपये की रिश्वत के साथ दबोचा गया।
बाराबंकी में विजीलेंस टीम ने लेखपाल अमित कुमार और उसके निजी मुंशी विनय को मात्र 6 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा और जेल भेज दिया।
फिरोजाबाद में बंदोबस्त अधिकारी कार्यालय के चपरासी और उसके बेटे को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
ये घटनाएं साफ संकेत देती हैं कि अब भ्रष्टाचार की जड़ें सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि निजी लोग भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के फिक्सर बनकर रिश्वतखोरी का धंधा चला रहे हैं, लेकिन सरकार की सख्ती ने उनके इस खेल पर ब्रेक लगाने को कमर कस ली है।
सरकार का मानना है कि भ्रष्टाचार मुक्त उत्तर प्रदेश तभी संभव है जब सरकारी तंत्र के साथ जुड़े हर उस व्यक्ति पर नजर रखी जाए जो रिश्वतखोरी में शामिल हो। चाहे वह कर्मचारी हो या उसका प्राइवेट फिक्सर।
सरकार का साफ संदेश है कि रिश्वतखोर और उसके फिक्सर, दोनों की अब खैर नहीं। योगी सरकार सुशासन और पारदर्शिता के रास्ते पर लगातार आगे बढ़ रही है। आपकी एक सजग शिकायत इस अभियान को और मजबूत बना सकती है।प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने को सरकार ने हेल्पलाइन नम्बर 9454402484, 9454401866 भी जारी किए हैं। कोई भी व्यक्ति रिश्वत मांगने की शिकायत संबंधित मोबाइल नम्बरों पर कर सकता है। एंटी करप्शन अथवा विजीलेंस टीम जाल बिछाकर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी और उसके फिक्सर को रंगे हाथ दबोच लेती है।
एटा में भी फिक्सरों की आएगी शामत
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एटा: जिले के डीएम अरविंद कुमार और पुलिस कप्तान डा. इलामारन जी वैसे भी भ्रष्टाचार के प्रति काफी सख्त हैं। दोनों अफसरों के सख्त रुख से अधीनस्थ कर्मचारी हलकान हैं। अब प्रदेश सरकार की फिक्सरों के प्रति कार्रवाई देख रिश्वतखोरों के होश उड़ गए हैं। सूत्रों के अनुसार, जिले में भी कई सरकारी अधिकारी-कर्मचारियों के फिक्सर हैं, जो मामलों को लेकर फिक्सिंग ( डीलिंग) कराते हैं। डीएम और एसएसपी की नजर अब ऐसे फिक्सरों पर है, जो सरकार की छवि धूमल करने के साथ ही लोगों का आर्थिक दोहन करते हैं। ऐसे फिक्सर दोनों अफसरों के रडार पर हैं।
