तीन महीने में चुनाव कराने का निर्देश, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट का इंतजार; प्रधान संगठन सुप्रीम कोर्ट में देगा चुनौती
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर चल रही अटकलों के बीच पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी। सरकार हाईकोर्ट के निर्देश के अनुसार चुनाव कराने के लिए तैयार है। हालांकि, ग्राम प्रधान संगठन ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का निर्णय लिया है। इससे पंचायत चुनाव की प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 14 अक्टूबर को प्रदेश सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने तथा आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। अदालत के आदेश के अनुसार चुनाव जनवरी 2027 तक कराए जाने हैं। साथ ही, पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को चुनाव होने तक प्रशासक के रूप में काम जारी रखने की अनुमति दी गई है।पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 16 अक्टूबर को कहा कि सरकार चुनाव कराने से पीछे नहीं हट रही है। जिलों में मतपत्र पहुंच चुके हैं और मतदाता सूची भी तैयार है। अब पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट मिलने के बाद चुनाव की तारीखों की घोषणा की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। मंत्री ने कहा कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाने की जरूरत नहीं है।
ओबीसी आरक्षण पर टिकी निगाहें,,, पंचायत चुनाव में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण को लेकर भी स्थिति महत्वपूर्ण है। हाईकोर्ट ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था के तहत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पिछड़ा वर्ग आयोग की जांच या रिपोर्ट लंबित रहने के आधार पर चुनाव प्रक्रिया को अनिश्चितकाल तक नहीं टाला जा सकता। ऐसे में आयोग की रिपोर्ट और आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया पर आगे की कार्रवाई निर्भर करेगी।
प्रधान संगठन अगले सप्ताह दाखिल करेगा अपील,,, राष्ट्रीय पंचायतीराज ग्राम प्रधान संगठन ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है। संगठन अगले सप्ताह अपील दाखिल कर सकता है। जिला पंचायत अध्यक्ष संघ और ब्लॉक प्रमुख संघ की ओर से भी चुनाव के समय को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं। इन संगठनों का तर्क है कि चुनाव से ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इन आपत्तियों से हाईकोर्ट के मौजूदा आदेश पर स्वतः रोक नहीं लगती।फिलहाल सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट जाने से इनकार और प्रधान संगठन की प्रस्तावित अपील के बाद पंचायत चुनाव की आगे की राह अदालत के आदेशों, ओबीसी आयोग की रिपोर्ट और निर्वाचन आयोग की तैयारियों से तय होगी। अभी तक मतदान की आधिकारिक तारीख घोषित होने की पुष्टि नहीं हुई है।
